पंखुड़ियाँ
समय के पंखों पर आशाओं के पखेरू लाए चुनकर जीवन की धूप-छाँव भरी पंखुड़ियाँ...
गुरुवार, 10 सितंबर 2020
मिन्नी की बात :
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सुनो! पता नहीं, क्या हो गया है सबको! कोई किसी से बात ही नहीं करता। सब मोबाइल में लगे हैं। मम्मी-पापा-दीदी, सब के सब। जानती हो, आज तो मुझे भी...
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शनिवार, 27 जून 2020
खारे दिन
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वह तिराहे के एक किनारे खड़ा था। सिर पर अंगोछा लपेटे। जिसका एक सिरा नाक-मुँह से होता हुआ कान तक जाकर गायब हो गया था। कुछ भी नाम हो सकता है उसक...
शनिवार, 23 मई 2020
बेगाने
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बाग़ के मालिक ने ढेला उठा कर वृक्ष की टहनियों पर दे मारा। चह-चह करते पंछी उड़ चले। फुटपाथ पर बैठा नजफ़ भावशून्य आँखों से आसमान में उन्हें दू...
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शनिवार, 28 सितंबर 2019
पहचान : लघु कहानी
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मुझे बहुत अच्छे लगते हैं प्रशांत भैया। जब भी सोनी बुआ के आने की खबर लगती तो मैं पूरे घर में फिरकी सी नाचने लगती। जुबान यह पूछ-पूछ कर हलकान...
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रविवार, 15 सितंबर 2019
गुब्बारा
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चूहा इधर से गया कि उधर से। पारिवारिक नोकझोंक के लिए किसी मुद्दे की आवश्यकता होती है क्या? और फिर बात तेरी-मेरी के खाल उधेड़ तक कब पहुँच जाती...
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मंगलवार, 10 सितंबर 2019
नो ऑप्शन
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"आपने एडमीशन फार्म में बच्चे का धर्म नहीं लिखा?" "जी, नहीं है।" "क्यों, आपका कोई धर्म नहीं है क्या?" ...
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रविवार, 8 सितंबर 2019
मोनालिसा
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फ़ोटोग्राफ़ी और कहानी लिखना सोनाक्षी का सबसे पसंदीदा शौक था। यह शौक उसकी रोजी-रोटी का सहारा भी था। अक्सर उसकी निगाहें सड़कों पर कुछ तलाशती चलत...
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