सोमवार, 23 मार्च 2015

‘फ़रिश्ता’

एक तो सड़ी गर्मी ऊपर से जाम में फंसी बस, सामने की सीट पर औरत की गोद में बच्चा दहाड़ें मार रहा था । उसकी बगल में बैठा आदमी बच्चे को गोद में लेकर कभी चुटकी बजा, कभी मोबाईल बजा, तो कभी उछाल कर फुसलाने की भरसक कोशिश कर रहा था । यह प्रक्रिया काफ़ी देर से चल रही थी इसलिए यात्रियों का भी ध्यान केंद्रित किए हुए थी, परेशान होकर उस आदमी ने बाहर झांका और बस से नीचे उतर गया, किसी तरह से वाहनों कूदते-फांदते थोड़ी देर बाद दूध लेकर लौटा ।

धीरे-धीरे जाम छंटने लगा बस ने भी रफ़्तार पकड़ ली थी । थोड़ी देर बाद वह आदमी उठकर गेट पर आया उसकी शर्ट की एक बांह और पैंट गीली थी, उसने इशारे से बस रुकवाई और अपना बैग लेकर नीचे उतर गया बस फिर चल पड़ी, यात्रियों की नज़रें एक दूसरे से टकराईं जिसमें हर्षान्वित आश्चर्य था । बच्चा खिड़की पकड़ खड़ा किलकारी मार रहा था ।