रविवार, 16 अगस्त 2009

तू अजब वसुंधरा है



नई नवेली तू अजब वसुंधरा है
तेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा है

माथे पे सूरज की बिंदिया सजाली
गालों पर उषा की लाली लगाली
नीला आसमानी आँचल उड़ा है
तेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा है


पंछियों के कलरव सी पायल है बोली
चली कहाँ तू सुन्दर सलोनी
घाघरे में धानी रत्नाकर उमड़ा पड़ा है
तेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा है


काले घुंघराले केशों सी फैली
है रजनी
नाजुक कमर पे नदियों की
है करधनी
कंगन में चाँद तारों का नगीना जड़ा है
तेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा है




(चित्र गूगल सर्च से साभार )

27 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बढ़िया. स्वतंत्रता दिवस पर धरा का मनभावन गुणगान. बधाई.

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  2. नई नवेली यह रचना बिलकुल नवेली है.
    क्या सौन्दर्य बोध कराया है नई नवेली का.
    बहुत खूबसूरत

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  3. अति सुन्दर रचना,
    आभार
    हे प्रभू यह तेरापन्थ
    मुम्बई टाईगर

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  4. बहुत ही सुन्दर रचाना है ..........बसून्धरा ऐसी ही होती है ............बहुत ही भावपुर्ण .....बधाई

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  5. लाजवाब रचना और उतना ही सुन्दर चित्र...सोने पर सुहागा...वाह.
    नीरज

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  6. वाह....
    जितनी सुन्दर कविता,
    उतना ही सुन्दर चित्र।
    बधाई।

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  7. shrangaar से bhari रचना .......... सच में ऐसी ही vasundhara होती होगी ......... gazab की kalpana shakti ..... क्या बात है ......... क्या खूब लिखा है ......

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  8. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है आपकी..
    बहुत खुबसूरत लिखा है आपने..
    बहुत बहुत बधाई ..
    भारत भूमि को हर पाठक के मन् में आपने अपनी कल्पना की शक्ति से मूर्त-रूप दे दिया है..
    वसुंधरा के सौंदर्य का सुन्दर चित्रण ...

    मज़ा आ गया ..
    जय हिंद..

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  9. बहुत सुंदर....इस कृति को सबके साथ बाटने का बहुत धन्यवाद

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  10. काले घुंघराले केशों सी फैली है रजनी
    नाजुक कमर पे नदियों की है करधनी
    कंगन में चाँद तारों का नगीना जड़ा है
    तेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा है
    अति सुन्दर चित्रण बसुधा का

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  11. काले घुंघराले केशों सी फैली है रजनी
    नाजुक कमर पे नदियों की है करधनी
    कंगन में चाँद तारों का नगीना जड़ा है
    तेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा है

    bahut sunder/pyari rachna. badhai.

    mere blog par aagman ke liye dhanyawaad.

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  12. खूबसूरत तरीके से आपने इस रचना को पेश किया.. हैपी ब्लॉगिंग

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  13. tere roop me saundrya bikhra pada......
    badee hee sundar rachna..man prassan ho gaya...nishya hee hindi sahitya aapse samridhh hogi

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