शनिवार, 18 जुलाई 2009

प्रौढ़ बचपन



रास्ते पर मैंने देखा

नन्हा सा एक प्रौढ़ बचपन

नहीं था उसके जीवन में

माता-पिता का प्यार -दुलार

उठा रखा था उसने हाथों में

अपने ही जैसा इक बचपन

साल चार के इस जीवन में

सिखा दिया था जीना उसको

जूझ रहा था पर हिम्मत से

लिए जिम्मेदारियों का बोझ स्वयं

नहीं था उसे कोई ग़म

देख के उसको आती मुझमें

दया
नहीं

जोश और ताकत वरन

दुआ करती हूँ उसको मिले

आने वाले इस जीवन में

सुख-सफलता

और

प्रसिद्धी पराक्रम



(पुरानी पोस्ट से)
(चित्र गूगल सर्च से साभार )

21 टिप्‍पणियां:

  1. दुआ करती हूँ उसको मिले
    आने वाले इस जीवन में
    सुख-सफलता
    प्रसिद्धी पराक्रम

    अर्चनाजी तिवारी
    बहुत सुन्दर।

    आभार/शुभमगल
    मुम्बई टाईगर
    हे प्रभु यह तेरापन्थ

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  2. मार्मिक --
    बहुत प्रभावशाली व सफल रचना

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  3. sachcha sahi najuk komal marmik our sahi shabdo me jammeer jhakajhod diya kawita ne........ham aaj kuchh bhi to nahi kar pa rahe bachapan bachane ke liye .....sirf apane liye jiye ja rahe hai

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  4. रास्ते पर मैंने देखा

    नन्हा सा एक प्रौढ़ बचपन

    नहीं था उसके जीवन में

    माता-पिता का प्यार -दुलार

    उठा रखा था उसने हाथों में

    अपने ही जैसा इक बचपन

    बहुत ही शसक्त पंक्तियाँ हैं...
    समाज की भीषण सच्चाई को उकेर कर रख दिया आपने..
    बहुत प्रभावित किया है मुझे आपकी इस कविता ने...

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  5. आपने एक रचना की याद दिला दी...दिल को छू लेनेवाली रचना भिक्षुक की....

    "पेट और पीठ दोनो मिलकर हैं एक
    चल रहा लकुटिया टेक
    मुट्ठी भर दाने को भूख मिटाने को...वो आता दो टूक कलेजे के करता...पछताता पथ पर जाता"

    काफी अच्छा चित्रण किया है...बचपन और गरीबी का...

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  6. बचपन का सजीव चित्रण और सम्वेदना रखने के लिए बधाई।

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  7. Bachpan to bahut pyara hota hai.Apne is par achha likha.

    पाखी के ब्लॉग पर इस बार देखें महाकालेश्वर, उज्जैन में पाखी !!

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  8. दुआ करती हूँ उसको मिले
    आने वाले इस जीवन में
    सुख-सफलता
    प्रसिद्धी पराक्रम!
    बहुत सुंदर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  9. जूझ रहा था पर हिम्मत से

    लिए जिम्मेदारियों का बोझ स्वयं

    नहीं था उसे कोई ग़म

    देख के उसको आती मुझमें

    दया नहीं

    जोश और ताकत वरन

    दुआ करती हूँ उसको मिले

    आने वाले इस जीवन में

    सुख-सफलता

    और

    प्रसिद्धी पराक्रम


    bahut achhi rachna
    aapki dua bahut achhi lagi

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  10. बहुत खूब कहा आपने
    रास्ते पर मैंने देखा

    नन्हा सा एक प्रौढ़ बचपन






    bahot khub bhai


    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  11. इस उमं में यह विचार हैं तो आपको आगे जाने से कोई नहीं रोक सकता ।

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