बुधवार, 20 अक्तूबर 2010

जीवन के रंग


आते जाते कितने मौसम
रंग बदलते रहते हरदम
कभी गर्मी के तीखे तेवर
कभी सर्दी की धूप मद्धम
कभी बरखा की झिर-झिर बूँदें
छेड़ रही हों जैसे सरगम

आते जाते कितने मौसम
रंग बदलते रहते हरदम

कभी कठिनाई की आंधी आए 
कभी आशाओं की किरणें चम-चम
कभी दुःख के बादल छाए
कभी खुशियों की बरखा छम-छम
धूप-छाँव, बदली, बरखा
सुख-दुःख, आंसू, खुशियाँ
जाने कितने बदले मौसम
जीवन भी कुछ ऐसा ही है
रूप बदलते इसके हरदम

आते जाते कितने मौसम
रंग बदलते रहते हरदम


(चित्र  गूगल   सर्च  से साभार )

18 टिप्‍पणियां:

  1. कभी गर्मी के तीखे तेवर
    कभी सर्दी की धूप मद्धम
    कभी बरखा की झिर-झिर बूँदें
    छेड़ रही हों जैसे सरगम

    सुख दुख की इसी धूप छाँव में जिंदगी चलती रहती है।

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  2. कभी कठिनाई की आंधी आए
    कभी आशाओं की किरणें चम-चम
    कभी दुःख के बादल छाए
    कभी खुशियों की बरखा छम-छम...

    मौसमों के बदलते तेवर को माध्यम बना कर
    बहुत अछा सन्देश दिया है आपने
    अपनी इस मासूम-सी नज़्म में ....
    अभिवादन .

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  3. ये जीवन भी तो माओसम की तरह है ... रंग बदलता रहता है ... अच्छा लिखा है बहुत ही ...

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  4. जीवन भी कुछ ऐसा ही है
    रूप बदलते इसके हरदम
    --------------
    बहुत सुंदर अर्चना.... बस यही जीवन है....

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  5. जीवन मौसम की ही तरह तो है एक मौसम जाता है तो दूसरा आता है लेकिन यहाँ जो बीत गया वो पुनः नहीं आता अंतर बीएस इतना है |
    बहुत अची रचना .........
    बधाई ....
    http://nithallekimazlis.blogspot.com/

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  6. जीवन के रंगों को समेटती सुन्दर व सार्थक कविता..बधाई.


    _________________
    'शब्द-शिखर' पर पढ़िए भारत की प्रथम महिला बैरिस्टर के बारे में...

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. आते जाते कितने मौसम
    रंग बदलते रहते हरदम

    badalte mausam ko bahut pyare se shabdo me dhala aapne..badhai..:)

    उत्तर देंहटाएं
  9. आते जाते कितने मौसम
    रंग बदलते रहते हरदम

    badalte mausam ko bahut pyare se shabdo me dhala aapne..badhai..:)

    उत्तर देंहटाएं
  10. आते जाते कितने मौसम
    रंग बदलते रहते हरदम

    badalte mausam ko bahut pyare se shabdo me dhala aapne..badhai..:)

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत खुबसूरत.........शानदार अच्छा लगा पढ़ कर -

    कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए- (अरे हाँ भई, सन्डे को भी)

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  12. आदरणीया अर्चना तिवारी जी

    सादर अभिवादन !

    बरखा सुख-दुःख, आंसू, खुशियाँ
    जाने कितने बदले मौसम
    जीवन भी कुछ ऐसा ही है
    रूप बदलते इसके हरदम
    आते जाते कितने मौसम
    रंग बदलते रहते हरदम

    बहुत भावपूर्ण गीत है …
    बहुत सुंदर !

    आजकल आप कहीं भी नज़र नहीं आ रहीं … मेरे यहां भी नहीं आईं , नई पोस्ट लगाए भी बहुत समय हो गया …

    आशा है , सपरिवार स्वस्थ-सकुशल हैं …
    हार्दिक शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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