बुधवार, 23 जून 2010

सृजन रुका नहीं करता है...



चाहे जितने झंझा आये
पर्वत डिगा नहीं करता है
जीवन  की कठिन परीक्षा  से
कर्मठ  हटा नहीं करता है

 एक कलम जो जाए टूट 

सृजन रुका नहीं करता है
कुछ पन्नों के फट  जाने से

लेख मिटा नहीं करता है 

दुःख के जब भी बदल छाए 
तब-तब  सुख की वर्षा लाये
काँटों की संगत पाकर भी 
गुलाब मुस्काया ही  करता है 

 तीखी गाली सुनकर  भी
सज्जन बुरा नहीं करता है 
कितने ही विषधर लिपटे हों
चन्दन मरा नहीं करता है 
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

21 टिप्‍पणियां:

  1. टूटी एक कलम तो क्या ग़म
    सूखी गर जो उसकी स्याही
    कुछ पन्नों के भर जाने से
    सृजन रुका नहीं करता है

    बहुत सुन्दर .... सकारात्मकता को बयां करती अच्छी कविता...

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  2. आहा क्या बात है ...
    टूटी एक कलम तो क्या ग़म
    सूखी गर जो उसकी स्याही
    कुछ पन्नों के भर जाने से
    सृजन रुका नहीं करता है
    बिन काँटों की संगत जोड़े
    गुलाब खिला नहीं करता है


    निर्बाध गति से चलता जीवन
    ठोकर से भी हार नहीं माना करता है ।
    अर्चना जी , कर्मठी की जगह कर्मठ कहना उपयुक्त लग रहा है , कर्मठ यानि कर्म में विश्वास रखने वाला व्यक्ति ।

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  3. टूटी एक कलम तो क्या ग़म
    सूखी गर जो उसकी स्याही
    कुछ पन्नों के भर जाने से
    सृजन रुका नहीं करता है ..

    बहुत ही अच्छी रचना .. ऐसी रचनाएँ अक्सर आशा का संचार करती हैं ... लाजवाब ...

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  4. बहुत सुंदर विचार।
    ---------
    क्या आप बता सकते हैं कि इंसान और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?
    अगर हाँ, तो फिर चले आइए रहस्य और रोमाँच से भरी एक नवीन दुनिया में आपका स्वागत है।

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  5. रचना में आपकी सकारत्मक सोच की झलक मिल रही है । बधाई इस सुन्दर कविता के लिए । चित्र भी बहुत खूबसूरत है।

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  6. रचना की विषयवस्तु प्रशंसनीय है ।
    सराहनीय ।

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  7. bahut hi acchi aur sacchi kavita .. ek himmat ki jarurat jo hoti hai uski bhaavnaaye chahhyi hui hai is kavita me , meri badhayi sweekar kare..

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  8. bahut hi khoobsurat likha hai aapne..
    shukriya..

    Meri Nayi Kavita aapke Comments ka intzar Kar Rahi hai.....

    A Silent Silence : Ye Kya Takdir Hai...

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  9. बहुत ही अच्छी रचना .. ऐसी रचनाएँ अक्सर आशा का संचार करती हैं ... लाजवाब ..

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  10. दुर्जन की संगत पाकर भी
    सज्जन बुरा नहीं करता है
    कितने ही विषधर लिपटे हों
    चन्दन मरा नहीं करता है
    bahut sahi, aur yahi hamari aatm shakti hai

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  11. बिन काँटों की संगत जोड़े
    गुलाब खिला नहीं करता है

    achhi baat kahi apne

    http://shayaridays.blogspot.com

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