गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

छाँव


विशाल पीपल की छाँव

देती है सबको ठाँव

खड़ा रहता है धूप में

सदा अटल रूप में

सदा रहती है जीवन की लहर

कोमल पत्तियों में ठहर

रहती है शाखों पे उमंग

हवाओं से पाकर तरंग

देती है जीवन की आशा

दूर करके सबकी निराशा

पाते हैं नीचे इसके

ज्ञान ध्यान अंतर्मन

3 टिप्‍पणियां:

  1. bodhivriksha ki kalpana dikhati hai... acchi baat hai... chhote chhote shabdon se badi baat kahna hua...

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  2. bahut sunder.sabhi rachnayen padi maene,shabdon ko achche se pirona aata hai aapko.

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  3. अर्चना तिवारी जी आपकी इस रचना को कवितामंच ब्लॉग पर साँझा किया गया है


    संजय भास्कर
    http://kavita-manch.blogspot.in

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